Productivity

Business Card बदलते हैं, Skills नहीं: Career और Success का नया Formula

हाल ही में The New York Times में एमि निटफेल्ड द्वारा लिखे गए एक विचार लेख में तर्क दिया गया कि ळमर्द के बहुत से सदस्य अब “कड़ी मेहनत करो, आगे बढ़ो” वाले काम के पारंपरिक समझौते में विश्वास नहीं करते।

उद्योगों में बदलाव, डिग्रियों के घटते मूल्य, छंटनी के आम होने और करियर के रास्तों के कम पूर्वानुमान योग्य होने के बाद, कई युवा यह सवाल कर रहे हैं कि क्या काम का पारंपरिक वादा अब भी विश्वसनीय रूप से वह स्थिरता और अवसर देता है, जिसकी पिछली पीढ़ियों को उम्मीद थी।

एक समय नौकरी केवल आय का साधन नहीं थी। यह स्थिरता, सम्मान और भविष्य की सुरक्षा का प्रतीक भी मानी जाती थी। व्यक्ति एक कंपनी या संस्था से जुड़ता, वर्षों तक मेहनत करता और अनुभव के साथ उसकी जिम्मेदारियां तथा आय दोनों बढ़ती जाती थीं।

तकनीक, ऑटोमेशन और कृत्रिम बुद्धिमत्ता ने काम की प्रकृति को तेजी से बदला है। कई पारंपरिक भूमिकाएं समाप्त हो रही हैं, जबकि नई भूमिकाओं के लिए अलग तरह के कौशल की आवश्यकता पड़ रही है। अब यह अधिक महत्वपूर्ण है कि व्यक्ति बदलती परिस्थितियों के साथ कितनी तेजी से सीख सकता है।

डिग्री किसी व्यक्ति को नौकरी तक पहुंचा सकती है, लेकिन उसका कौशल उसे लंबे समय तक प्रासंगिक बनाए रख सकता है। संचार, समस्या-समाधान, तकनीकी समझ, नेतृत्व, रचनात्मकता और नई चीजें सीखने की क्षमता ऐसे हुनर हैं जिनकी उपयोगिता किसी एक नौकरी या उद्योग तक सीमित नहीं होती।

इस बदलाव का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि युवा अब नौकरी को जीवन की अंतिम मंजिल के बजाय अपने विकास का एक माध्यम मानने लगे हैं। वे बेहतर कार्य-जीवन संतुलन, सीखने के अवसर, स्वतंत्रता और अपने काम में उद्देश्य तलाश रहे हैं। यह बदलाव केवल नई पीढ़ी की अधीरता नहीं है; यह बदलती अर्थव्यवस्था की वास्तविकता का परिणाम भी है।

हालांकि, इसका अर्थ यह नहीं है कि मेहनत का महत्व खत्म हो गया है, बल्कि मेहनत का स्वरूप बदल गया है। पहले अधिक घंटे काम करना सफलता का प्रमुख संकेत माना जाता था। आज लगातार सीखना, अपने कौशल को अपडेट करना और बदलते अवसरों को पहचानना उतना ही महत्वपूर्ण है।

आने वाले समय में शायद सबसे सुरक्षित करियर वह नहीं होगा जिसमें व्यक्ति जीवनभर एक ही काम करता रहे, बल्कि वह होगा जिसमें व्यक्ति नए काम सीखने की क्षमता बनाए रखे। इसलिए आज सिर्फ कड़ी मेहनत करो और आगे बढ़ो नहीं, बल्कि सीखते रहो, अपना हुनर बढ़ाओ और बदलती दुनिया के साथ आगे बढ़ो।

The New York Times का यह लेख मुझे मेरे पिताजी के बिजनेस कार्डों के उस फ्रेम की याद दिलाता है।

मैं उनकी उस यात्रा और उनकी उस प्रतिबद्धता की उस निशानी को चाहता था।

बचपन में, मेरे पिताजी का बेसमेंट वर्कशॉप मुझे वैसा लगता था जैसा मैं सांता की वर्कशॉप की कल्पना करता था। अलमारियों पर सावधानी से अलग-अलग किए गए स्क्रू, कीलें और दूसरी छोटी-छोटी चीजों से भरे जार रखे होते थे।

हमारे घर में अगर कोई चीज टूट जाती थी, तो उसे बस पिताजी के लिए अलग रख दिया जाता था। वह कुछ भी ठीक कर सकते थे। इससे भी महत्वपूर्ण बात यह थी कि उनका मानना था कि चीजें ठीक करने लायक होती हैं। चीजों को ठीक करना और उन्हें बदल देना अलग मानसिकता है।

वह साधन-संपन्न, चतुर, दृढ़ निश्चयी और इतने धैर्यवान है कि किसी समस्या पर तब तक विचार करते रहते हैं, जब तक उसका समाधान न मिल जाए। वह इस बात से निराश नहीं होते हैं कि समाधान में समय लग सकता है।

मेरे पिताजी को अपने काम पर गर्व है। वह केवल काम पूरा नहीं करना चाहते हैं। वह चाहते हैं कि लोग परिणाम से खुश हों। उन बिजनेस कार्डों में से एक पर एक प्रतीक के साथ एक ही शब्द लिखा है- Quality

उनके बिजनेस कार्ड बदलते रहे, जैसे उनके व्यवसाय और सेवाएँ बदलती रहीं। लेकिन उनका काम लगातार यह व्यक्त करता रहा कि वह कौन थे। अपने काम के माध्यम से उन्होंने अपने मूल्यों और अपने चरित्र को सामने रखा।

आज उस फ्रेम को देखते हुए, मुझे उसमें अब केवल बिजनेस कार्डों का संग्रह नहीं दिखाई देता। मुझे उसमें बदलाव और निरंतर प्रयास की निशानियाँ दिखाई देती हैं। हर कार्ड उनके जीवन के एक और दौर का प्रतिनिधित्व करता है-खुद को बदलने, सीखने, सेवा करने और आगे निर्माण करते रहने का।

वह फ्रेम मेरे साथ इसलिए जुड़ा हुआ है क्योंकि वह एक ऐसा सवाल पूछता है, जो आज के समय में आश्चर्यजनक रूप से प्रासंगिक है।

अगर करियर अब स्थायी नहीं रह गए हैं, तो हमें इसके बजाय क्या बनाना चाहिए?

यह एक उद्यमी का सवाल है। यह नेतृत्व का सवाल है। यह करियर का सवाल है। देर-सबेर हममें से ज्यादातर लोग संगठन, उद्योग, जिम्मेदारियाँ या पद बदलेंगे। बिजनेस कार्ड बदलेंगे।

जितना मैं बड़ा हो रहा हूं, उतना ही मुझे लगता है कि मुद्दा ऐसा करियर बनाना नहीं है जो कभी न बदले। मुद्दा ऐसी खूबियां विकसित करना है, जो बाकी सब कुछ बदल जाने के बाद भी आपके साथ रहें।

अक्सर मेरी माँ मुझसे कहती हैं कि शिक्षा ही एक ऐसी चीज है जिसे कोई कभी मुझसे छीन नहीं सकता। जब मैं छोटा था, तो मुझे लगता था कि उनका मतलब डिग्रियों और प्रमाणपत्रों से है।

अब मुझे लगता है कि उनका मतलब इससे भी कहीं बड़ा था। शिक्षा आपको दुनिया को देखने का एक तरीका देती है। यह आपको विकल्प देती है। यह ऐसी चीज बन जाती है जिसे आप अपने साथ लेकर आगे बढ़ सकते हैं, चाहे आगे कुछ भी आए।

Gen Z के नजरिए की एक बात मुझे सबसे ज्यादा पसंद है कि उनमें से कई लोग अब नौकरी के पदनाम को अपनी पहचान के साथ नहीं मिलाते। मुझे लगता है कि वे सही हैं, लेकिन मुझे यह भी लगता है कि पिछली पीढ़ियों की एक चीज ऐसी है जिसे बचाए रखना चाहिए।

काम को हमारी पहचान बनने की जरूरत नहीं है। लेकिन अपने सर्वाेत्तम रूप में, काम उन सबसे स्पष्ट तरीकों में से एक बन सकता है जिनसे हम यह व्यक्त करते हैं कि हम कौन हैं।

हमारा पेशा या नौकरी यह तय नहीं करती कि लोग हमें किस रूप में याद करेंगे। बल्कि हमारा व्यवहार, हमारे गुण और हम अपने काम को किस तरीके से करते हैं, उससे हमारी पहचान बनती है। यानी जीवन में केवल पद या सफलता महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि दयालुता, ईमानदारी, ज्ञान, हास्य और दूसरों की मदद करने की भावना भी हमारी पहचान बनाती है

आप क्या करते हैं और आप जिस तरह से वह काम करते हैं, उससे लोग आपके बारे में क्या जानते हैं-इन दोनों में अन्तर होता है।

शायद यही सवाल लोगों को खुद से पूछना चाहिए। केवल यह नहींरू

“मैं कौन-सा पद हासिल करना चाहता हूं?”

बल्कि:

“मैं अपने अंदर ऐसा क्या बना रहा हूं जो मेरे हर उस पद के साथ जाएगा, जिसे मैं कभी संभालूंगा?”

आपके साथ क्या रहेगा

करियर में सबसे मूल्यवान निवेश अक्सर पदनाम नहीं होते। वे प्रतिबद्धताएँ होती हैं-गुणवत्ता, सीखने, प्रामाणिकता और ऐसा व्यक्ति बनने की प्रतिबद्धता, जिसके काम से लगातार यह दिखाई दे कि वह कौन है।

ये प्रतिबद्धताएँ आपकी प्रतिष्ठा, आपका निर्णय, आपके रिश्ते और जहां भी आप जाएं वहां मूल्य पैदा करने की आपकी क्षमता बन जाती हैं। ये वे चीजें बन जाती हैं जिनके लिए लोग आप पर भरोसा कर सकते हैं, चाहे आपके बिजनेस कार्ड पर कुछ भी लिखा हो।

बिजनेस कार्ड बदलते हैं। पदनाम बदलते हैं। कंपनियां बदलती हैं। सवाल यह नहीं है कि आपका करियर बदलेगा या नहीं। वह बदलेगा।

बेहतर सवाल यह है कि जब आपका करियर बदलेगा, तब आपके बारे में ऐसी कौन-सी चीज होगी जिसे लोग पहचानते रहेंगे।

खुद से एक कठिन सवाल पूछना जरूरी हैः-

“अगर कोई मेरे काम द्वारा छोड़ी गई निशानियों को देखे, तो वह मेरे बारे में क्या सीखेगा? वह मेरे काम से यह क्या समझेगा कि मैं कौन हूं?”

स्त्रोत-इंटरनेट

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